श्री कैलास कपिल पब्लिक चैरिटेबल
ट्रस्ट (रजि०) की अन्य गतिविधियॉं
आज कन्याओं/महिलाओं के लिए हर प्रकार की शिक्षा उपलब्ध है।(व्यवसायिक
एवं आध्यात्मिक) पौष्टिक आहार भी उपलब्ध है, हठयोग/शारीरिक शिक्षा-कर्राटे
आदि भी उपलब्ध है, समाज एवं प्रशासन से सुरक्षा की भी व्यवस्था है।
शिक्षा, पौष्टिक आहार, सुरक्षा, ये सब होने पर भी संसार की किसी जाति/सम्प्रदाय
की कन्या/महिला अकेली बिना सहारे के सुरक्षित जीवन व्यतीत नहीं कर
सकती। नित्य कन्याओं,महिलाओं को भ्रष्ट करने, बलात्कार के समाचार मिलते
रहते है। हमारे आश्रम के सरल अनुष्ठान से कन्या अकेली बिना सहारे के
आजीवन सुरक्षित रह सकती है। यह सरल अनुष्ठान कन्या को घर पर ही रहते
हुए, अपनी शिक्षा के साथ - साथ ही करना होता है। इस अनुष्ठान से कन्या
का आत्म बल इतना बढ जाता है कि यदि उस महिला का पति दुराचारी होगा
तो ऐसा पति इस श्रेष्ठ ,आत्मबली पत्नी का स्पर्श भी नहीं कर सकेगा।
जब स्पर्श भी नहीं कर सकेगा तो संस्कारहीन संताने उत्पन्न ही नहीं
होगी। समाज सुधारक इस सूचना पर ध्यान दे।हमारे आश्रम की, समाज सेवा
योजनाओं के अन्तर्गत यह एक परोपकारी सेवा है।
आज रामायण-गीता का पाठ श्रीमद्भागवत सप्ताह सुनना- सत्यनारायण की
कथा सुनना-गायत्री मंत्र का जप- बाइबिल-कुराण शरीफ -गुरूग्रन्थ साहब
का नित्न पाठ, गंगा सेवन, गऊ सेवा, यज्ञ, अन्नदान, अस्पताल-विद्यालय,
तालाब-कुॅआ, प्याऊ निर्माण, धर्मशाला निर्माण, कन्यादान आदि से लोग
सब प्रकार सेसुखी क्यों नहीं हो रहे है ?
भविष्य पुराण के अनुसार प्रसिद्ध श्री गंगा आज प्रभावशाली नहीं है।
भविष्य पुराण के इस प्रमाण के अनुसार श्री गंगा की प्रभावशाली अवधि
५००० वर्ष तक ही थी, जो अवधि अब समाप्त हो चुकी है जैस अवधि पार औषधी।
अत: आज कौनसा देवता- कौनसा तीर्थ -कौनसा मंत्र प्रभावशाली है, उसीको
अपनाने से ही हमे लाभ प्राप्त हो सकता है अन्यथा नही। हमारा आश्रम
यह सब ज्ञान आपको देता है।
हर व्यक्ति (किसी राष्ट्र,जाति,सम्प्रदाय का हो) किसी न किसी इष्ट
या शक्ति को मानता है और वह व्यक्ति अपने इष्ट/शक्ति को भोग लगाकर
ही उनका प्रसाद लेता है। यह प्रक्रिया विश्व की हर जाति,सम्प्रदाय
का मानव करता है, मंदिरों, मठों, गुरूद्वारों में यह भोग लगाने की
प्रक्रिया विधि-विधान से की जाती हैै। हमारे इष्ट ने यदि हमारे द्वारा
अर्पित भोग पर अपनी दिव्य दृष्टि डाली होती तो प्रसाद में दिव्यता
आ जाती और निश्चित रूप से प्रसाद खाने वाले की बुद्धि सात्विक हो जाती
। जिसका स्पष्ट अर्थ है कि संसार में सभी लोग सात्विक हो जाते और संसार
में छल-कपट, चोरी-डकैती-बलात्कार आदि नहीं होने चाहिए।(जैसा खाओं अन्न
वैवा हो मन)जैसे एक्सरे मशीन आधे मिनिट में ही हमारे शरीर के अन्दर
के अंगोे की स्थिति बता सकती है तो क्या प्रभु की दिव्य दृष्टि हमारे
भोग पर दिव्यता के गुण नहीं डालेगी ? अवश्य डालेगी। परन्तु हम देख
रहे हैं कि संसार में छल - कपट आदि बढ़ रहा है, जिसका स्पष्ट अर्थ
हैकि प्रभु ने हमारे भोग पर अपनी दिव्य दृष्टि ही नहीं डाली। प्रभू
को भोग लगाए बिना हम खा नहीं सकते। भोग पर प्रभु दृष्टि नहीं डाल रहे
है। अब क्या करें? दिव्य नदी नर्मदा तट पर स्थापित हमारे श्री विमलेश्वर
महादेव आश्रम में यह दिव्य प्रक्रिया होती है कि हमारे आश्रम का प्रसाद
खाने वाले की बुद्धि निश्चित रूप से सात्विक हो जाती है। मदिरापान
करने वाला व्यसन से मुक्त हो जाता है आदि।प्रसाद को डाक द्वारा भेजने
की व्यवस्था है।
राजस्थान बालकल्याण समिति, झाड़ोल-फलासिया
श्री कैलास कपिल पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट ने एक राजस्थान बालकल्याण
समिति, झाड़ोल-फलासिया जिला उदयपुर राजस्थान(भारत) को गोद लिया है।
यह संस्था आदिवासी अनाथ बच्चों को शिक्षा तथा उनके परिवारों की सहायता
के लिए कई कार्यक्रम कर रही है। इन आदिवासी और अनाथ बच्चों में अच्छे
संस्कार डालने का कार्यक्रम हमारा आश्रम कर रहा है।
इस आश्रम के सचिव गिरिजाशंकर शर्मा है इनके पुनीत कार्य को देखकर
कई विदेशी संस्थायें इनको आर्थिक सहयोग दे रही है। इस संस्था को दिया
गया दान आयकर नियम ८० जी के अन्तर्गत आयकर से मुक्त है। इनकी योजनाओं
को निम्न वेबसाइट पर देख सकते है।
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