सफल शिव सेवक
कुछ ऐसे व्यक्तियों के नाम दे रहे हैं जो करोड़ों जन्मों के पुण्यों
से प्राप्त मानव जन्म को सफल करना चाहते है। सात्विक आहार, धार्मिक
बुद्धि, माता-पिता के आज्ञाकारी, मेहनती, ईमानदार, देहधारी गुरू की
आवश्यकता को मानने वाले जो कि कई मंदिरों में गए-मठों में गए - साधु-महात्माओं
से मिले - कई धार्मिक ग्रन्थ पढे, फिर भी भटकते ही रहे, कई सांसारिक
कामनाएं अधूरी ही रह गई, संस्कारी संतान नहीं हुई, अकाल मृत्यु हो
गई, पतिव्रता पत्नी नहीं मिली, महिला को अनुकूल पति नहीं मिला, पितरों
की सद्गति नहीं हुई, पुराने पापों का नाश नहीं हुआ,इष्ट की कृपा नहीं
हुई। ऐसे कुछ व्यक्ति जो कि इस सच्चे पातशाह श्री जयशिव बाबा के दरबार
में आकर हर प्रकार से सुखी बन रहे है और मानव जन्म को सफल कर रहे है।
श्री अरूणाचॅल पर्वत (तमिलनाडु राज्य) यहॉं पर विष्णु और ब्रह्मा
का युद्ध हुआ था। शिवजी की उत्पत्ति तथा पूजन सर्वप्रथम यहीं पर हुआ।यहॉं
के मूल निवासी श्री सी० सुब्रामण्यन् एम०ए०,एम०एड जो की शिक्षक थे,
सात्विक-धार्मिक-शाकाहारी-ईमानदार-अरूणाचल की परिक्रमा करने वाले कई
प्रकार से दु:खी थे। अब हमारे आश्रम (श्री कैलास कपिल पब्लिक चेरिटेबल
ट्रस्ट) से मार्ग-दर्शन प्राप्त कर अब हर प्रकार से सुखी है।
मोहम्मद, ईसा मसीह, नानक के पूर्वज इन्हीं प्रभू शिव की पूजा करके
ही अवतारी पुरूष या कुल-तारक संतान उत्पन्न कर सके। खेल-खेल में श्री
शिव की शिवलिंग में पूजा करने वाले श्रीकर गोप बालक की आठवी पीढी में
नन्द बाबा का जन्म हुआ,जिनके यहॉं श्री विष्णु के कृष्ण अवतार का जन्म
पुत्र रूप में हुआ।(प्रमाण श्री शिवमहापुराण कोटिरूद्रसंहिता अध्याय
१७ श्लोक ६५ से ७२ )
एक हीरखॉं नामक सिन्धी मुसलमान बड़ा ही सात्विक व्यक्ति है, शाकाहारी
है, पंच नमाजी है, वह मक्का मदीना जाकर हज भी कर चुका है। वह दु:खी
था । उसके दो पुत्र है, एक माता-पिता से अगल हो गया। छोटा पुत्र उसके
साथ रहता था। उस पुत्र के संतान नहीं हुई और उसे सरकारी नौकरी मिली।
हीरखॉं हमारे सद्गुरू के दरबार में आया और एक सरकारी कार्यालय में
बाग के माली का काम करता था, अपने बगीचे के कुछ पुष्प नित्य शिवलिंग
की पूजा हेतु लाकर देने मात्र से ही उसके पोत्र हो गया और उसके पुत्र
को सरकारी नौकरी भी मिल गई। श्री शिाव की पूजा-सामग्री का दान करने
मात्र से हिन्दू धर्म को न मानने वाले व्यक्ति की भी सांसारिक कामनाओं
की पूर्ति हो गई।
काशी के पण्डित अनिल कुमार शर्मा( मुन्ना जी) संतान की कामना से हमारे
सद्गुरू के दरबार में आये। प्रभु शिव ने उन पर ऐसी कृपा की कि उनका
सांसारिक मोह समाप्त करके, उन्हें अपनी सेवा में ले लिया। अन्तर्यामी
प्रभु शिव ही वास्तविक रूप से हमारे एक-मात्र हितैषी है। देवर्षि नारदजी,
विष्णु के पास उनका रूप मॉगने के लिए आये(क्योंकि हर एक स्त्री रूपवान
पति चाहती है) प्रभु शिव की आज्ञा से विष्णु ने नारद का मुख बन्दर
का बना दिया और अन्य शेष अंग अपने समान बना दिये। प्रभु शिव की कृपा
से नारद जी विवाह करने से बच गये और वे आज भी देवताओं के भी पूज्य
है।
एक हिन्दू राजपूत परिवार में पत्नी तथा तीन बच्चे एक तालाब पर आत्म-हत्या
के लिए जाना चाह रहे थे क्योंकि उनका पति नित्य शराब पीता था और ३
प्रतिशत ब्याज पर धन उधार लेता था। प्रभु शिव की कृपा से वह परिवार
सद्गुरू के दरबार में आया और उनके बताए हुए सरल प्रयोगों से अब हर
प्रकार से सुखी है। पति का शराब का व्यसन छूट गया, सभी कर्जा उतर गया,
घर में सात्विक,धार्मिक वातावरण बन गया, बैंक में भी धन जमा होने लगा।
श्री गोवर्द्धन पर्वत, जिसकी परिक्रमा हर वैष्णव श्रद्धा-भक्ति से
करता है। गोवर्द्धन के मानसी गंगा के तट पर एक मुखिया जी का विश्व
प्रसिद्ध मंदिर हैं। उनके मंदिर में श्री कृष्ण के साथ प्रभु शिवजी
भी विराजमान है। मुखिया जी के बेटे ही उनकी पूजा करते है, फिर भी वे
आर्थिक दृष्टि से एवं पुत्र न होने से दु:खी थे। इस आश्रम से मार्ग-दर्शन
प्राप्त कर अब उनका अर्थ संकट भी दूर हो गया और पुत्र रत्न भी प्राप्त
हो गया।
ऐसे पिरीवारों में एक राजस्थान से आये बाष्ट जाट परिवार के अनिल कुमार
खोखर विश्नोई परिवार के रामदास अपगॉव कला निवासी हमारे आश्रम द्वारा
सिखाई गई क्रियाओं से अब हर प्रकार के सुख का अनुभव कर रहे है। नर्मदा
तट के निवासी एक गिरदोनिया ब्राह्मण परिवार के दोनों भाई - विनोद तथा
विमल एवं दोनों बहने ममता एवं मीना हमारे आश्रम द्वारा सिखायी गई स्नान
एवं पूजा-विधि से हर प्रकार के सुख का अनुभव कर रहे है।
कश्यप गोत्रीय ब्रह्मचारी गिरीश भट्ट निवासी कण्डारा, जिला रूद्र प्रयाग
उत्तरॉचल (हिमालय) निवासी हमारे आश्रम में रह रहे है। सही देहधारी
सद्गुरू के मार्ग-दर्शन से अब सब प्रकार से सुखी है।
नर्मदा तट होशंगाबाद में जन्मी, हरदा जिला में ब्याही श्रीमती ममता
पाठक, बहुत ही सात्विक एवं धार्मिक महिला हैं। हरदा से २० किलोमीटर
दूर इन्दौर सड़क मार्ग ५९ ए पर स्थित दिव्य नदी नर्मदा का सेवन करती
रही परन्तु हमारे हंडिया स्थित श्री विमलेश्वर महादेव आश्रम से (दिव्य
नदी नर्मदा में स्नान - पूजन का सही ढंग सीखने पर)अब सब प्रकार से
सुखी है।
बिहार
रंजना तथा उनके भाई शरत।
मेवाड, उदयपुर
गोपाल कपिल, ज्योति कपिल
कोटा
मोहनलाल कुमावत
झाड़ौल, फलासिया जिला उदयपुर
अमृता रानी, गिरजाशंकर शर्मा,नीतू
गाजियाबाद
हेमन्त कपिल, दीपक शर्मा
उत्तराचॅंल(हिमालय के)
पंड़ित हरिशंकर गोस्वामी,गिरिश भट्ट
होशंगाबाद
विनोद,विमल,ममता,मीना गिरदोनिया
भोपाल
सुधा पाराशर, नरेश तथा हेमा श्री वास्तव
अपगॉव कलॉं जिला हरदा
रामदास-आशा खोखर विश्नोई, अनिल, रेवाराम,संतोषवसु बाष्ट जाट
हंडिया जिला हरदा
मनोहरलाल नामदेव
जोधपुर
अनिल कश्यप, विमला,बीना,लक्ष्मी,कैलास,अरूणा-मदन परिहार, राजेश गहलोत,
प्रदीप देवडा,सुरेश-प्रेमलता गहलोत, नरेश भाटी, ललितेन्द्र सोलंकी,
अशोक-सरला सोलंकी, नीतू गहलोत, बाबूलाल, श्रवण प्रजापत,वन्दना सक्सेना,
देवीसिंह गहलोत, भरत टाक,राज टाक, कंचन ,इन्दु-इंदिरा खोखर विश्वनोई
पंजाब
रमण बाली, राजेश वैद, राजेन्द्र कोचर
रॉंची
मदन दुबे
तमिलनाडु
के सी०बालसुब्रमण्यनम्,श्रीमती रागिनी अन्नामलै
महाराष्ट्र
अशोक मंगला कामल,उषा, माणे
इंग्लैण्ड
विश्वमोहन कपिल ००४४ २१८ ६५६३३५५
यू०एस०ए०
श्रीमती श्री कान्ता दत्ता
उपर्युक्त प्रमाण से यह स्पष्ट है कि ये सभी सुख जैसे प्रचुर धन,
शत्रुओं का दमन, पुराने पापों का नाश केवल प्रभु शिव की (शिवलिंग)
पूजा से ही प्राप्त हो सकते है। इस प्रमाण में एक रहस्य-मयी बात यह
है कि कुल-तारक संतान की प्राप्ति (देहधारी सद्गुरू से दीक्षा लेकर)
प्रभू शिव की पूजा से ही प्राप्त हो सकती है।(प्रमाण श्री शिवमहापुराण
कोटिरूद्रसंहिता अध्याय ३७ ) |