शिवपुराण
यह
लेख हमने सद्गुरू महाराज श्री जय शिव बाबा तथा श्री १००८ विरक्त
महात्मा स्वामी शंकरानन्द जी का ध्यान करके और उमा-महेश्वर के चरणों
का ध्यान करके, जन कल्याण की नि:शुल्क सेवा करने के लिए लिखा है।भगवान
शिव ही एकमात्र ईश्वर है। प्रभु शिव को कोई नहीं जानता। उनकी शक्ति
अष्ट-भुजी, सिंह वाहिनी दुर्गा नहीं जानती। श्री गणेश नहीं जानते,
ब्रह्मा, विष्णु नहीं जानते, राम कृष्णादि अवतार नहीं जानते। देवताओं
के गुरू वृहस्पति नहीं जानते, दैत्यों के गुरू शुक्राचार्य नहीं
जानते फिर हम कैसे जान सकते है ? हमारी पात्रता देख कर सद्गुरू महाराज
ने जितना हमे समझाया है, उसी से हमारी सभी सांसारिक कामनाओं की प्राप्ति
हो रही है और हम मोक्ष की ओर भी अग्रसर हो रहे हैं। निश्चित रूप
से हमारा अगला जन्म उत्तर कुल में होगा और तीन जन्मों में हम मुक्त
हो जायेंगे। इसमें कोई संदेह नहीं है। हम यहॉं आपके लिए ब्रह्मा-विष्णु
-ऋषि मुनियों आदि ने प्रभु शिव के बारे में जो कहा है और जो एक लाख
श्लोक वाले , २४६७२ श्लोकों में संक्षिप्त,मूल संस्कृत भाषा में
जो लिखा है उसे उद्धत कर रहे है।
भ्रम को पैदा करने वाले अन्य अनेक शास्त्रों तथा पुराणों को सुनने
से क्या लाभ है ? अत: एक श्री शिवमहापुराण को ही सुनना चाहिए जो
सदैव मुक्तिदान के लिए गरजता रहता है।(शौनक जी का प्रश्न और व्यास
जी के शिष्य तथा सभी पुराणों में दीक्षित, सूतजी का उत्तर - स्कन्द
पुराण में शिव पुराण का महात्म्य अध्याय -१ श्लोक ३७ पृष्ठ ५)
श्री शिव महापुराण की कथा को सुनने मात्र से जिस प्रकार चित्त की
शुद्धि हो जाती है, वैसी चित्त-शुद्धि अन्य उपायों से नहीं होती।
महादेव जी ने पार्वती जगदम्बा के अत्यन्त आग्रह से श्री शिवमहापुराण
का निर्माण किया है।(श्री गोकर्ण महाबलेश्वर तीर्थ में श्री शिवमहापुराण
वक्ता ब्राह्मण देवता का भ्रष्ट ब्राह्मणी चंचुला को उपदेश अध्याय
४ श्लोक १-२१ पृष्ठ ११-१२) |