पृथ्वी पर सुखी जीवन के लिये
क्रियाएं
(अ)
देहधारी सद्गुरू से दीक्षा लेकर पंच देवताओं की (गणेश-सूर्य-विष्णु-दुर्गा
और शंकर) पूजा करे।
(ब) अग्नि में हवन करें (यज्ञ)
(स) गुरू परम्परा से शिव कर्मकाण्ड में दीक्षित ब्राह्मण के शरीर
का नित्य षोडशोपचार पूजन करें।
इन तीनों में ब्राह्मण का नित्य पूजन सर्वश्रेष्ठ है। शिव कर्मकाण्डी
दीक्षित ब्राह्मण का जिस घर में षोडशोपचार पूजन नहीं होता, उस घर
वालों के पुराने पापों का नाश नहीं हो सकता और नये भाग्य का निर्माण
नहीं हो सकता। इस क्रिया के बिना ऐसा है जैसे "दुल्हा केे बिना
बारात" बैण्ड़ तो बज रहा है, बाराती भी नाच रहे हैं, परन्तु
दुल्हन नहीं है। इस सूत्र का दूसरा रहस्यमय अर्थ यह है कि जिस घर
में ऐसे दीक्षित शिव-कर्मकाण्डी ब्राह्मण का नित्य षोड़शोपचार विधि
से नित्य पूजन होता है, उन घर वालों को (देवताओं), गणेश-सूर्य-विष्णु-दुर्गा
और शंकर की पूजा करने की कोई आवश्यकता नहीं है और न ही किसी यज्ञ
में देवताओं की प्रसन्नता के लिए अग्नि में आहुतियॉं डालने की आवश्यकता
है । (प्रमाण सूतजी का ऋषियों को उपदेश श्री शिवमहापुराण विद्येश्वर
संहिता अध्याय १४ श्लोक २४ पृष्ठ संख्या ५३).
हर माता-पिता चाहते हैं कि उनके यहॉं राम-कृष्ण-मोहम्मद-ईसा मसीह-
नानक जैसे अवतारी पुरूष ही पुत्र बनकर आयें, दुर्गा ही पुत्री बनकर
आयें। सारा प्रयत्न करने पर भी ऐसे अवतारी पुरूष आपके यहॉं संतान
बनकर क्यों नहीं आते। देहधारी सद्गुरू से दीक्षा लिए बिना, प्रभु
शिव की शिवलिंग में पूजा किये बिना, प्रभु शिव का भाग नियमित हर
माह निकाले बिना, यह आपका दान, सही (परीक्षित) कर्मकाण्डी,ब्राह्मण
द्वारा दिव्य नदी नर्मदा के तट पर पूजा एवं भोग सामग्री के रूप में
प्रयोग किए बिना, आपको कुल-तारक संतान की प्राप्ति नहीं हो सकती।
इसी प्रकार प्रतिव्रता पत्नी प्राप्त करने के लिए भी यही नियम है।
कन्या चाहे किसी भी राष्ट्र-जाति या सम्प्रदाय की हो - चाहे विकलांग
हो - चाहे कुरूप हो-चाहे कम पढी-लिखी हो- चाहे धन का अभाव हो, उसे
भी रूपवान, धनवान,बुद्धिमान, अनुकूल पति चाहिए। कई धनी व्यक्ति धन
देकर अपनी कन्या के लिए वर ढूढ़ते हैं। धन से योग्य वर की प्राप्ति
नहीं हो सकती। हमारा आश्रम कन्याओं के लिए (बिना दहेज)योग्य वर प्राप्ति
हेतु सरल अनुष्ठान सिखाता है जिससे घर बैठे ही कन्या को योग्य वर
की प्राप्ति होगी।निर्धन कन्याओं के लिए यह सेवा नि:शुल्क है।(केवल
पंजीकरण शुल्क जमा कराना होगा)धनी कन्याओं को शुल्क जमा कराना होगा।
इस सरल अनुष्ठान में एक विशेषता है कि कन्य विवाहोपरान्त जीवन भर
सुखी रहेगी, यश की प्राप्ति होगी,धन का अभाव नहीं रहेगा और निश्चित
रूप से कुल-तारक संतान को ही उत्पन्न करेंगी।
ब्रह्म (शिव) ने ब्रह्मा को सृष्टि रचना का वरदान दिया था।सारा प्रयत्न
करने पर भी ब्रह्मा अच्छी सृष्टि उत्पन्न नहीं कर सके। तब ब्रह्मा
ने विष्णु का स्मरण किया।विष्णु ने आकर ब्रह्मा को, प्रभू शिव के
निमित्त तपस्या करने का निर्देश दिया। विष्णु के निर्देशानुसार ब्रह्मा
ने तपस्या की, तब भक्तवत्सल प्रभु शिव अर्द्धनारीनटेश्वर (आधा शिव
आधी पार्वती) रूप में प्रकट हुए और ब्रह्मा को अच्छी सृष्टि उत्पन्न
करने का वरदान दिया।(प्रमाण श्री शिवमहापुराण सृष्टिखंड अध्याय १५-१६)
अत: स्मरण रहे कि जब सृष्ठिट के रचयिता ब्रह्मा भी प्रभु शिव की
आराधना किए बिना अच्छी सृष्टि नहीं कर सके , तब आप और हमारी क्या
गिनती है ? अत: कुल तारक संतान प्राप्त करने हेतु इस आश्रम से सम्पर्क
करें। |