श्री कैलास कपिल पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट ट्रस्ट
द्वारा प्रदत्त सेवाऐं
श्री कैलास कपिल पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट (रजि०) गऊघाटी मण्डोर, जोधपुर
पिन ३४२३०४ राजस्थान (भारत) विश्व की सर्वोत्तम परोपकारी संस्था है।
इस ट्रस्ट द्वारा किसी का धर्म परिवर्तन नहीं किया जाता किसी को शिष्य
नहीं बनाया जाता।
गऊघाटी मण्डोर आश्रम में दो गदि्दयॉं है
(१) श्री अमरनाथ की गुफा वाले विश्व प्रसिद्ध श्री १००८ जयशिव बाबा
की गद्दी
(२) एक विरक्त महात्मा श्री १००८ स्वामी शंकरानन्द जी की गद्दी।
इन दो महात्माओं द्वारा सिखाएं गए गुप्त मंत्रों से हम अपना कल्याण
भी करते हैं और सम्पर्क में आने वालों का हित भी करते है। आश्रम द्वारा
जगत के कल्याण हेतु निम्नलिखित सेवाऐं उपलब्ध है।
प्रभु शिव, पार्वती, गणेश, कार्तिकेय, भैरव, नन्दिकेश्वर, विष्णु,
ब्रह्मा, इन्द्रादि लोकपाल, चारो वेद, सभी पुराणों, ऋषि-मुनियों, गन्धर्वो
आदि सभी को वश करने वाला प्रभु उमा-महेश्वर को प्रसन्न करने वाला समस्त
पापों का नाशक, शत्रु-नाशक, दिव्य स्तोत्र (श्री शिव महापुराण वायवीय
संहिता उत्तर भाग अध्याय ३१ पृष्ठ ९३६-९४१) इस स्तोत्र से सभी फल प्राप्त
करने के लिए दीक्षा इस आश्रम से दी जाती है।
समस्त विघ्नों के नाश के लिए और समस्त कामनाओं की प्राप्ति के लिए
श्री शिव की शिवलिंग में पूजा करने से पूर्व श्री गणेश की पूजा कैसे
करें? उसके लिए आश्रम से सम्पर्क करें।
एक्सरे मशीन आधे मिनिट में ही हमारे शरीर के अन्दर के अंगोे की स्थिति
बता सकती है तो क्या प्रभु की दिव्य दृष्टि हमारे भोग पर दिव्यता के
गुण नहीं डालेगी ? अवश्य डालेगी। परन्तु हम देख रहे हैं कि संसार में
छल - कपट आदि बढ़ रहा है, जिसका स्पष्ट अर्थ हैकि प्रभु ने हमारे भोग
पर अपनी दिव्य दृष्टि ही नहीं डाली। प्रभू को भोग लगाए बिना हम खा
नहीं सकते। भोग पर प्रभु दृष्टि नहीं डाल रहे है। दिव्य नदी नर्मदा
तट पर स्थापित श्री विमलेश्वर महादेव आश्रम में यह दिव्य प्रक्रिया
होती है कि आश्रम का प्रसाद खाने वाले की बुद्धि निश्चित रूप से सात्विक
हो जाती है। मदिरापान करने वाला व्यसन से मुक्त हो जाता है आदि।प्रसाद
को डाक द्वारा भेजने की व्यवस्था है।
शिव मंदिर तथा शिवलिंग की प्रतिष्ठा की विधि (सद्गुरू उपमन्यु का श्री
कृष्ण को उपदेश, श्री शिव महापुराण वायवीय संहिता उत्तर भाग अध्याय
३६ पृष्ठ ९४९-९५२) आप यदि अपने घर में शिव मंदिर बनाना चाहते हैं तो
इस आश्रम से सम्पर्क करें।
प्रभु शिव के सर्वोत्तम-ज्ञान "पाशुपत विद्या" का विधान
एवं सद्गुरू से दीक्षा लेकर पाशुपत विद्या का अनुष्ठान करने वाला कैसे
सदेह शिव-लोक को जाकर मुक्त हो जाता है।(सूतजी का उपदेश श्री शिव महापुराण
वायवीय संहिता उत्तर भाग अध्याय ४० पृष्ठ ९६०-९६१)
सद्गुरू के मुख से इस २४६७२ श्लोक वाले शिव महापुराण को एक बार सुनने
मात्र से सम्पूर्ण पाप भस्म हो जाते है, जो अभक्त है, उसे शिव भक्ति
मिल जाती है और जो भक्त है उनकी प्रभु शिवजी के चरणों में दृढ़ भक्ति
हो जाती है। दूसरी बार सुनने पर सद्भक्ति प्राप्त हो जाती है और तीसरी
बार सुनने पर मुक्ति मिलती है। इसलिए मोक्ष के इच्छुक इस शिव महापुराण
का बार-बार श्रवण करें। सर्वोत्तम फल पाने की इच्छा से इस शिव महापुराण
की पॉंच आवृतियॉं करनी चाहिए, ऐसा करने पर इसका पूर्ण फल मिलता है।
इसमें सन्देह नहीं।
जो मनुष्य भक्ति-भाव से इस शिवमहापुराण को सुनता है वह इस लोक में
सभी प्रकार के सुख भोगों को भोग कर अन्त में मुक्ति लाभ करता है।(व्यास
जी का उपदेश श्री शिव महापुराण वायवीय संहिता उत्तर भाग अध्याय ४१
श्लोक ४३-५१ पृष्ठ ९६३-६४)
अपने आश्रम के भक्तों के लिए नर्मदा पुराण के अनुसार ३० दिन के कल्प
की यहॉं पूर्ण व्यवस्था है। इस कल्प में पुराने पापों का प्रायश्चित
तथा नए भाग्य के निर्माण के अनुष्ठान कराये जाते हैं जो कि विश्व में
अन्यत्र कहीं नहीं होते।
अनजाने में ही गलती(पाप) हो जाने पर बुरा फल भुगतना ही पड़ता है, जैसे
एक अबोध बालक अग्नि के पास जाता है तो अग्नि उसे जला ही देगी। विश्व
का हर मानव यह चाहता है कि जो अनजाने में उसने गलतियॉं (पाप) किये,
उनका बुरा फल उसे न भोगना पड़े।प्रभु शिव ही एकमात्र प्रभु है, उनकी
शरण में (दीक्षा लेकर) जाने से और उनके बताये हुए मार्ग से भगवान शिव
का प्रदोष पूजन करने से ही पुराने पापों का बुरा फल भोगे बिना ,उनका
नाश किया जा सकता है। प्रभु शिव का भाग(कर्मानुसार १० से ५० प्रतिशत
जो कि ऊॅपर वर्णित किया जा चुका है)नियमित दिव्य नदी नर्मदा के तट
पर दान करने से आपको बुरा फल (पाप) भुगतना नहीं पडेग़ा। यह आश्रम प्रदोष-पूजन
की दीक्षा देता है।(श्री शिव महापुराण शतरूद्र संहिता, अध्याय ३१ पृष्ठ
५५३-५५६ )
कन्या चाहे किसी भी राष्ट्र-जाति या सम्प्रदाय की हो - चाहे विकलांग
हो - चाहे कुरूप हो-चाहे कम पढी-लिखी हो- चाहे धन का अभाव हो, उसे
भी रूपवान, धनवान,बुद्धिमान, अनुकूल पति चाहिए। कई धनी व्यक्ति धन
देकर अपनी कन्या के लिए वर ढूॅंढ़ते हैं। धन से योग्य वर की प्राप्ति
नहीं हो सकती। आश्रम कन्याओं के लिए (बिना दहेज)योग्य वर प्राप्ति
हेतु सरल अनुष्ठान सिखाता है जिससे घर बैठे ही कन्या को योग्य वर की
प्राप्ति होगी। निर्धन कन्याओं के लिए यह सेवा नि:शुल्क है।(केवल पंजीकरण
शुल्क जमा कराना होगा) धनी कन्याओं को शुल्क जमा कराना होगा। इस सरल
अनुष्ठान में एक विशेषता है कि कन्या विवाहोपरान्त जीवन भर सुखी रहेगी,
यश की प्राप्ति होगी,धन का अभाव नहीं रहेगा और निश्चित रूप से कुल-तारक
संतान को ही उत्पन्न करेंगी।
आज कन्याओं/महिलाओं के लिए हर प्रकार की शिक्षा उपलब्ध है।(व्यवसायिक
एवं आध्यात्मिक) पौष्टिक आहार भी उपलब्ध है, हठयोग/शारीरिक शिक्षा-कर्राटे
आदि भी उपलब्ध है, समाज एवं प्रशासन से सुरक्षा की भी व्यवस्था है।
शिक्षा, पौष्टिक आहार, सुरक्षा, ये सब होने पर भी संसार की किसी जाति/सम्प्रदाय
की कन्या/महिला अकेली बिना सहारे के सुरक्षित जीवन व्यतीत नहीं कर
सकती। नित्य कन्याओं,महिलाओं को भ्रष्ट करने, बलात्कार के समाचार मिलते
रहते है। आश्रम के सरल अनुष्ठान से कन्या अकेली बिना सहारे के आजीवन
सुरक्षित रह सकती है। यह सरल अनुष्ठान कन्या को घर पर ही रहते हुए,
अपनी शिक्षा के साथ - साथ ही करना होता है। इस अनुष्ठान से कन्या का
आत्म बल इतना बढ जाता है कि यदि उस महिला का पति दुराचारी होगा तो
ऐसा पति इस श्रेष्ठ ,आत्मबली पत्नी का स्पर्श भी नहीं कर सकेगा। जब
स्पर्श भी नहीं कर सकेगा तो संस्कारहीन संताने उत्पन्न ही नहीं होगी।
यह परोपकारी सेवा समाज सुधार के उददेश्य से की जारही है।
आप अपने जन्म नक्षत्र ,जन्म तिथी, विवाह तिथी, बच्चों की जन्म तिथी
इत्यादि पर आश्रम द्वारा दिव्य नर्मदा नदी का अभिषेक, भोग और वहॉं
छोटी-छोटी अबोध बालिकाओं को भोजन करवाके आश्चर्यजनक लाभ प्राप्त कर
सकते है। इस अन्नदान का लाभ आपको आजीवन प्राप्त होता रहेगा।
गीता के कर्मवाद को सही प्रकार से समझने के लिए आश्रम से सम्पर्क करें।
श्री शिवमहापुराण के पार्वतीखंड अध्याय ५४ में पतिव्रता स्त्री अपनी
माता-पिता तथा पति की तीन-तीन पीढ़ियों का उद्धार कर देती है। जिस
घर में प्रतिव्रता स्त्री होती है, उसके पति की अकाल मृत्यु नहीं हो
सकती।(प्रमाण श्री शिवमहापुराण युद्धखंड वृन्द्धा तथा तुलसी का चरित्र)
वर्तमान ससमय में हमारा यह अनुभव है कि अच्छे संस्कारी होने के नाते
कन्यायें कुल तारक सिद्द्ध हो रही है। अत: आपके यदि कन्या रत्न है
तो आपकी कन्या कुल-तारक कैसे बन सकेगी ? उसके लिए आश्रम से भ्रम को
दूर करने के लिए मार्गदर्शन नि:शुल्क आश्रम से प्राप्त करें।
प्रभु शिव की पूजा में त्रुटियॉं रह जाने से हानियॉं भी होती है। पुष्पदन्त
गन्धर्व रचित श्री शिव महिम्न: स्त्रोत के अनुष्ठान से इन त्रुटियों
का कुप्रभाव पड़ने से बचा जा सकता है। हमारा आश्रम इस बचाव के प्रयोग
सिखाता है।
इस विमलेश्वर महादेव आश्रम में ६० वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं को
आजीवन स्थापित करने की व्यवस्था है। जिसमें आवास,भोजन, पूजा सामग्री
दी जाती है और श्री नर्मदा एवं शिव की पूजा भी सिखायी जाती है। इस
सुविधा से महिला का शेष जीवन सुधरेगा, शांतिपूर्ण मृत्यु होगी और निश्चित
रूप से अगला जन्म राजकुल में होगा। मरने पर अंतिम संस्कार और श्राद्ध
की भी व्यवस्था है। भक्त महिलाओं को शुल्क एडंवास में जमा करना होता
है।
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